Jagjit Singh – The man beyond words || part 2

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Jagjit Singh – The man beyond words || part 2

Here I am writing the second post on Jagjit Singh ji because आज उनकी बहुत याद आ रही है ! In last post (Read “here“), I talked about the song “Shamm-e-majaar” from album “Desires”.

Desires album is truely filled with such gems and today I will bring to you another song from the same album with the beautiful beautiful lyrics… ! The song is named “गुलशन की फकत” !

Read the lyrics along with, when you listen to the song… try to understand and absorb the song within yourself. And then tell me about the peace of mind you get!

 

 

 

Lyrics:

गुलशन की फकत फूलों से नहीं, कांटो से भी झीनत होती है ,
जाने के लिए इस दुनिया में ग़म की भी जरुरत होती है… !

ऐय वाइज्हे नादान करता है, तू एक क़यामत का चर्चा,
यहाँ रोज निगाहें मिलती है, यहाँ रोज क़यामत होती है !

वो पुर्सिश-इ-ग़म को आये है कुछ कह न सकूं , चुप रह न सकूं,
खामोश रहूँ तोह मुश्किल है, कह दूँ तो शिकायत होती है !

करना ही पड़ेगा जब्त-इ-आलम, पीने ही पड़ेंगे ये आसू,
फ़रियाद-ओ-फुगाँ से ऐय नादान, तौहीने मोहोब्बत होती है !

जो आके रुकेगा मल पे सबा, वो अश्क नहीं वो पानी है ,
जो अश्क न छलके आँखों से, उस अश्क की कीमत होती है !

पता नहीं जगजीत सिंह जी इतनी आसानी से इतनी मुशील बातें कैसे कह जाते थे. मेरे लिए तो वो और उनकी आवाज एक  अजूबा थे, है और रहेंगे !

 

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